खबर के बाद रातोंरात बदली अटल प्रतिमा की सूरत? लीपापोती तो हुई, लेकिन तकनीकी जांच और जवाबदेही पर अब भी सन्नाटा

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। नगर पंचायत मरवाही में स्थापित भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर उठा विवाद अब और गहरा गया है। प्रतिमा में दिखाई दे रही दरारों और निर्माण गुणवत्ता को लेकर Lallanguru.in में खबर प्रकाशित होने के महज 24 घंटे के भीतर प्रतिमा के कई हिस्सों पर मरम्मत या लीपापोती जैसे निशान दिखाई देने लगे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या खबर के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ या पहले से ही मरम्मत की तैयारी चल रही थी।
दरारें थीं, अब दिख रहे हैं मरम्मत के निशान

ताजा तस्वीरों में प्रतिमा के विभिन्न हिस्सों पर नई परत, पुट्टी अथवा मरम्मत सामग्री जैसे निशान स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। जिन स्थानों पर पहले दरारें नजर आ रही थीं, वहां अब सतह को समतल करने का प्रयास प्रतीत होता है। हालांकि, इस संबंध में नगर पंचायत अथवा संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
बिना तकनीकी जांच मरम्मत?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रतिमा की पहले किसी सक्षम तकनीकी एजेंसी से जांच कराई गई या सीधे मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया? यदि तकनीकी परीक्षण हुआ है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और यदि जांच नहीं हुई, तो फिर इतनी जल्दबाजी में मरम्मत करने का निर्णय किस आधार पर लिया गया?
करोड़ों नहीं, लेकिन सार्वजनिक धन का सवाल भी अहम

प्रतिमा का निर्माण सार्वजनिक धन से कराया गया है। ऐसे में यदि निर्माण सामग्री, गुणवत्ता या स्थापना प्रक्रिया में कोई तकनीकी कमी रही है तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है। केवल सतही मरम्मत कर देना उन मूल सवालों का जवाब नहीं माना जा सकता, जो प्रतिमा में आई दरारों को लेकर उठाए जा रहे हैं।
जांच और जवाबदेही की मांग तेज
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रतिमा में वास्तव में संरचनात्मक खामियां हैं तो इसकी स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि निर्माण कार्य किस एजेंसी ने किया, गुणवत्ता परीक्षण किस स्तर पर हुआ और मरम्मत किसके निर्देश पर कराई गई।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस पूरे मामले में आधिकारिक रूप से क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या केवल मरम्मत तक मामला सीमित रहेगा या निर्माण गुणवत्ता और जिम्मेदारी तय करने के लिए विस्तृत जांच भी कराई जाएगी।।








